आज कितना बदल गया है इंसान...?

गणतंत्र को बचाना है तो भ्रष्ट मंत्रियों को जनयुद्ध के जरिये सरे आम फांसी देनी होगी......

मंगलवार, 7 सितंबर 2010

इस गणतंत्र को बचाना है तो लोभी,भोगी,स्वार्थी और भ्रष्टाचार को पोषण देने वाले लोगों को देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे सम्माननीय पदों पर से हटाने के आवाज को बुलंद करना होगा ....

गणतंत्र भ्रष्ट और नैतिकपतन हो चुके लोगों के नेतृत्व क़ी वजह से पूरी तरह अस्त होने क़ी कगार पे है ,जिसका उदय सिर्फ और सिर्फ इन लोगों के खिलाप इस देश के 80 प्रतिशत जनता द्वारा निड़र होकर सड़कों पर निकलकर आवाज उठाने से ही हो सकता है ...

इस प्रधानमंत्री ने न्याय और संवेदनशीलता को एकदम भुला दिया है प्रधानमंत्री क़ी कुर्सी के भोग और विलाश में  , इसने इस देश को पत्थर बनने और भ्रष्टाचार को सहने के लिए मजबूर कर दिया है ,अब तो इसने हद ही कर दी है ...


हमारा हमेशा से मानना रहा है क़ी कोई व्यक्ति किसी पद पर बैठकर महान नहीं बल्कि उस पद क़ी मर्यादा के अनुसार आचरण करने से होता है |




एक तरफ जहाँ सर्वोच्च न्यायालय के एक जज ने न्याय और इंसानियत को जिन्दा करने के लिए अभूतपूर्व निर्णय दिया और शरद पवार जैसे भ्रष्ट मंत्री क़ी वजह से सड़ चुकी व्यवस्था को आदेश दिया क़ी अनाज को सड़ाने से अच्छा है क़ी उसे गरीबों में मुफ्त बाँट दिया जाय | ऐसा आदेश सरकार को देकर सर्वोच्च न्यायालय के माननीय जज ने ना सिर्फ सर्वोच्च न्यायालय के मर्यादा को बढाया बल्कि न्याय और इंसानियत का संतुलन कैसे होता है इसका अभूतपूर्व उदाहरण सरकार और इस देश क़ी जनता के सामने पेश किया | 




वहीँ दूसरी ओर हमारे देश के प्रधानमंत्री जो इस देश क़ी जनता के सेवा के लिए तनख्वाह पाते हैं ,ने इस आदेश के बाद सर्वोच्च न्यायालय को सरकार के नीतिगत मामलों से दूर रहने को कहा | 



ऐसा कहकर मनमोहन सिंह जी ने ना सिर्फ न्याय को हतोत्साहित करने का काम किया है बल्कि भ्रष्टाचार को बढाने तथा शरद पवार जैसे भ्रष्टाचारियों को सरकारी संरक्षण देने क़ी भी कोशिस क़ी है | मनमोहन सिंह जी ने ऐसा बयान देकर अपने मानसिक दिवालियापन और इस देश क़ी जनता के प्रति गंभीर असंवेदनशीलता का परिचय दिया है | अब वक्त आ गया है क़ी हमसब को मिलकर ऐसे निकम्मे प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री जैसे पद को छोड़ने के लिए मुहीम चलाने क़ी जरूरत है | शर्मनाक है मनमोहन सिंह जी का बयान और दिमागी दिवालियापन....?




हम ऐसे अन्याय और भ्रष्टाचार को पोषण देने वाले बयान देने वाले प्रधानमंत्री का पुरजोड़ विरोध करते और हमें इस बात का बेहद दुःख है क़ी एक निकम्मा व्यक्ति हमारे देश के प्रधानमंत्री जैसे सम्माननीय पद पर बैठा है जिससे हमारा देश और समाज नरक बनता जा रहा है | आप सबसे भी आग्रह है क़ी आप लोग भी अपने स्वयं के अंतरात्मा के आवाज पर निड़र होकर इस प्रधानमंत्री के बारे में अपने विचार यहाँ रखें ...  



शर्मनाक के साथ-साथ खतरनाक है क़ी अब ऐसे लोगों को इस देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे जिम्मेवार और सम्माननीय पदों पर बैठाया जा रहा है जो देश क़ी जनता के प्रति जिम्मेवार होने के वजाय दलालों और भ्रष्टाचारियों के प्रति ज्यादा जवाबदेही दिखाते हैं और जिसकी वजह से इस देश में सत्य,ईमानदारी और इंसानियत लगभग ख़त्म होती जा रही है | शायद इनकी मनसा इस गणतंत्र को दलालों का तंत्र बनाने का है | शायद यही वजह है क़ी शरद पवार और राजा जैसे लोग इन सम्माननीय पदों से भी ऊपर हो गए हैं और इनपर कोई भी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है और देश में एक सन्देश जा रहा है क़ी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पदों पर बैठा व्यक्ति भी इन भ्रष्टाचारियों के रहमों करम पे  है | 

शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

इस गणतंत्र में सच्चे और भ्रष्टाचार के खिलाप लड़ने वालों क़ी औकात भारत सरकार के नजर में एक कुत्ते बिल्ली से ज्यादा कुछ भी नहीं.....?

     

श्री हरी प्रसाद जिसने इस देश के लोकतंत्र के चुनावी प्रक्रिया क़ी धांधली को उजागर करते हुए यह साबित करने का प्रयास किया क़ी मशीन को कैसे हैक कर किसी एक पार्टी को फायदा पहुँचाया जा सकता है इस बात पर ना सिर्फ शोध किया बल्कि उसे प्रमाणित भी किया |
लेकिन श्री हरी प्रसाद को हैदरावाद में मुंबई पुलिस द्वारा उनके आवास से गिरफ्तार करना इस बात को साबित करता है की इस देश में सच्चे लोगों की तथा भ्रष्टाचार के खिलाप लड़ने वालों की औकात भारत सरकार के नजर में एक कुत्ते बिल्ली से ज्यादा कुछ भी नहीं ...?
इस बात को निम्नलिखित तथ्यों से भी प्रमाणित किया जा सकता है ....

1 - भारत सरकार अभी तक संसद भवन पर हमले के आरोपी को फांसी देने में तत्परता नहीं दिखा पाई है ....


2 -आदिवासी लड़की को नंगा घुमाया जाता है दबंगों द्वारा उस पर भारत सरकार की आँखें नहीं खुलती है ...

3 - देश भर में सच्चे सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा RTI कार्यकर्ताओं को कुत्ते-बिल्ली की तरह भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा कहीं भी कभी भी मार दिया जाता है ,लेकिन अभी तक किसी को भी भारत सरकार सजा नहीं दे पाई है ... 

4 -चुनाव आयोग में ऐसे कई अधिकारी हैं जिनके पास अड्बों की संपत्ति है क्या उनकी जाँच करने वाला कोई है ...? मुख्य चुनाव आयुक्त को किसी चुनाव सुधार पर शोधकर्ता बनाने के वजाय खेल मंत्री बनाया जाता है और खेल के पीछे भ्रष्टाचार का बेशर्मी भरा खेल खुले आम खेला जाता है ,लेकिन भारत सरकार कोई कार्यवाही नहीं करती है ... 

5 -जब हरी प्रसाद ने शोध के लिए EVM मशीन की मांग की थी और उसे ठुकरा दिया गया था इसी से साबित होता है की EVM मशीन में भारी खामियां है | 

क्योंकि अगर कोई EVM मशीन छेड़-छाड़ करने बाद भी  किसी एक पार्टी के पक्ष में या विपक्ष में कार्य करता रह जाता है तो निश्चय की इस मशीन को बनाने वाली कंपनी तथा इसे खरीदने वाली सरकार तथा इसे चुनाव में लागू करने वाली चुनाव आयोग के मुखिया गुनाहगार हैं ,जिसे देश के साथ और देश के लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के साथ गद्दारी करने के लिए फांसी की सजा होनी चाहिए ...इस मशीन में छेड़-छाड़ के बाद इस मशीन का काम करते रहना ही अपने आप में गंभीर खामियां है जिसे कोई मामूली कम्प्यूटर जानकार भी साबित कर सकता है ...

6 -यहाँ यह बात बेहद गंभीर है की डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी ने खुलेआम सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2009 के आम चुनाव में विदेशी हैकर्स को भारी पैसा देकर अनुबन्धित किया, जो दिल्ली के पाँच सितारा होटलों में बड़े-बड़े तकनीकी उपकरणों के साथ ठहरे थे, और इसकी गहन जाँच होनी चाहिये | निश्चय ही यह देश के अस्तित्व से जुड़ा मामला है इसलिए श्री हरी प्रसाद को EVM मशीन की चोरी के आरोप के साथ-साथ सोनिया गाँधी पर लगे आरोपों की भी जाँच जरूर होनी चाहिए और कानून की नजर में सोनिया गाँधी और हरी प्रसाद को एक नजर से देखा जाना चाहिए | जरूरत पड़े तो इस मामले में चुनाव आयोग के अधिकारियों की भी सख्त जाँच होनी चाहिए और सबकी ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट भी की जानी चाहिए |  

अगर ऐसा नहीं होता है तो देश के सच्चे लोग भ्रष्टाचार के खिलाप लड़ाई को बंद कर दें क्योंकि इस देश में ऐसे लोगों को कभी भी भारत सरकार किसी भी तरह से सुरक्षा नहीं दे सकती ठीक उसी तरह जैसे किसी कुत्ते बिल्ली की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती है | जरा सोचिये श्री हरी प्रसाद को गिरफ्तार करने के वजाय उन्हें आरोप पत्र देकर न्यायिक जाँच में सहयोग करने की नोटिस नहीं दी जा सकती थी ..? क्या हरी प्रसाद जैसे सच्चे समाज के हितैषी के साथ इस तरह का व्यवहार उचित है...? विपक्ष तथा मिडिया का इस दिशा में कुछ भी सार्थक नहीं किया जाना निश्चय ही शर्मनाक है ...


खैर हमारे जैसे लोगों के दिल में तो श्री हरी प्रसाद   जैसे लोगों के लिए इस देश के इस वक्त के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के प्रति  सम्मान और श्रधा से भी ज्यादा सम्मान और श्रधा है | श्री हरी प्रसाद जी आज के महात्मा गाँधी हैं जो सत्य और न्याय के लिए निडरता से इस देश की अंग्रेजों से भी ज्यादा भ्रष्ट हो चुकी व्यवस्था के खिलाप लड़ रहें है | ऐसे लोगों को हमारा हार्दिक नमन है और पूरे विश्व के ब्लोगरों से आग्रह है की इस नेक इंसान के पक्ष में आगे आयें और जितना हो सके उनका हरसंभव मदद और सहायता करें | ऐसे लोगों को सरकार में बैठे भ्रष्ट लोगों और किसी राजनितिक पार्टी की नहीं बल्कि पूरे देश के लोगों की सहायता और सहयोग की जरूरत है |

शनिवार, 14 अगस्त 2010

कल गणतंत्र में एक बार फिर आजादी मिल जाएगी ...?

जब तक ऐसे भ्रष्ट नेता देश के विकाश के साधन और संसाधन को खुद का विकाश करने के लिए पूरी आजादी से लूटते रहेंगे और देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद पर बैठे लोग ऐसे लोगों पर कोई भी कार्यवाही करने में असमर्थ रहेंगे तबतक देश में आजादी एक ख्वाब और सपना ही रहेगा ..

कल देश के निकम्मे प्रधानमंत्री को 
एक बार फिर कुव्यवस्था को नहीं सुधारने और प्रधानमंत्री जैसे सम्माननीय पद को शर्मसार करने क़ी आजादी मिल जाएगी ..


कल देश में शरद पवार जैसे भ्रष्ट मंत्रियों को देश को लूटने क़ी एक बार फिर आजादी मिल जाएगी...

कल देश में भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों को अपनी तनख्वाह,भत्तों और सुख सुविधा को गरीबों का खून चूसकर भी अपने मन मुताबिक बढाने क़ी एक बार फिर आजादी मिल जाएगी ....असली आजादी ...?


कल देश के पुलिस व्यवस्था को इमानदार,सच्चे,देशभक्त,गरीब और लाचार लोगों के किसी भी शिकायत पर कोई भी कार्यवाही नहीं करने क़ी एक बार फिर आजादी मिल जाएगी ...

कल देश के भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों और उनके अपराधी प्रतिनिधियों को बैंक तथा जिला प्रशासन के सहयोग से सभी जन्कल्यानकारी योजनाओं को लूटने और देश के विकाश को नकली विकाश में बदलने क़ी एक बार फिर आजादी मिल जाएगी ...



कल देश के गरीब,इमानदार,सच्चे,अच्छे,देशभक्तों को अपमानित होने,भूखे मरने,अन्याय व अत्याचार सहकर मरने तथा सत्य व न्याय के ढोंग के दर्दनाक अवस्था को सहने क़ी एक बार फिर आजादी मिल जाएगी ...

देश के ९०% भ्रष्ट मंत्रियों को अपने मन मुताबिक देश को बेचने और अपना काला धन स्विस बैंक में भरने तथा खुलेआम भ्रष्टाचार का नंगा खेल खेलने क़ी एक बार फिर आजादी मिल जाएगी ... 

कल देश के सभी भ्रष्ट जाँच अधिकारियों को किसी भी घोटाले क़ी जाँच क़ी कागजी कार्यवाही कर पैसा बनाने और किसी भी भ्रष्टाचारी को सजा नहीं देने क़ी आजादी एक बार फिर मिल जाएगी ....




कल देश के भ्रष्ट और एय्यास जजों तथा वकीलों को कानून,सत्य तथा न्याय को खुले आम बेचने और पूरी न्याय व्यवस्था को शर्मसार करने क़ी एकबार फिर आजादी मिल जाएगी ...

कल देश के आम नागरिकों को भी कुव्यवस्था और भ्रष्टाचार के दुर्गन्ध युक्त शासन को एक बार फिर ह़र-हाल में सहने क़ी आजादी मिल जाएगी ...

गुरुवार, 29 जुलाई 2010

सभी ब्लोगरों से आग्रह आप अपने ब्लॉग का एक पोस्ट ऐसे सच्चे और इमानदार गणतंत्र के रक्षक को जरूर समर्पित कीजिये ,तब जाकर कुछ बदलाव आएगा ...

आज जहाँ ज्यादातर विधायक स्वार्थवश देश समाज को लूटने के लिए भ्रष्टाचार और अपने अधिकार का दुरुपयोग कर इस देश और समाज को नरक बनाने पर तुले हुए है ऐसे में श्री सुखराम कोली जैसे सच्चे और बेहद इमानदार विधायकों का होना आशा क़ी एक किरण के रूप में सभी अच्छे,सच्चे,इमानदार व देशभक्त भारतीय नागरिकों के प्रेरणा स्त्रोत का काम कर रहें हैं | ऐसे नेक इंसान को हमारा हार्दिक नमन |

इस महान गणतंत्र"भारत"के राजस्थान राज्य के धौलपुर के बसेड़ी के विधायक सुखराम कोली शिक्षक बनकर स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं | महत्वपूर्ण बात यह नहीं क़ी वह बिधायक का पद त्यागकर शिक्षक बनना चाहते हैं |

महत्वपूर्ण बात यह है क़ी श्री सुखराम कोली बेहद इमानदार और सच्चे इंसान हैं और उसका सबूत है -सुखराम कोली के घर के बेडरूम में कूलर तक नहीं है। मनोरंजन के लिए एक छोटा सा ब्लैक एंड व्हाइट टीवी है। विधायक को आवास के रिनोवेशन के लिए लाखों रुपए मिलते हैं लेकिन सुखराम ने एक पाई भी खर्च नहीं क़ी मात्र आधा बीघा जमीन के मालिक सुखराम कोली का विचार है  कि एक शिक्षक बन जाने के बाद यदि मैं 100 लोगों को शिक्षित कर पाऊँ, तो मेरी सबसे बड़ी सफलता होगी। विधायक रहते हुए मैं किसी का भला नहीं कर सकता। यह मेरा विश्वास है।

श्री सुखराम कोली जी को उनके ऐसे विचारों के लिए ब्लॉग पर सबसे पहले नारायण बारेठ  बीबीसी संवाददाता, जयपुर ने अपने ब्लॉग पोस्ट 

पर लिखकर सम्मानित किया था ,उसके बाद राज भाटिया जी ने
पर लिखकर उनको सम्मान देने क़ी कोशिस क़ी और उसके बाद महेश परिमल जी ने
नारायण बारेठ जी

राज भाटिया जी

महेश परिमल जी

इस पोस्ट पर उनके बारे में लिखकर उनको सम्मानित किया | हम इन तीनो व्यक्ति को इनके समाज व देश हित में सोचने वाले एक इमानदार इंसान के बारे में अपने ब्लॉग के जरिये लिखकर सम्मान देने के लिए इनका हार्दिक धन्यवाद करते हैं और उन सभी का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने अपनी प्रतिक्रियाओं या विचारों से इस नेक इंसान के सम्मान को बढाने के प्रयास को मजबूती दी | हमारा आग्रह है सभी ब्लोगरों से क़ी श्री सुखराम कोली जैसे बेहद इमानदार व नेक इंसान को सम्मान देते हुए अपने ब्लॉग का एक पोस्ट जरूर समर्पित करें | आप ऐसा कर अपने देश व समाज को आगे बढाने के ईमानदारी भरे प्रयास को भी मजबूती प्रदान करेंगे |
 

बुधवार, 21 जुलाई 2010

पूरे गणतंत्र और देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री कि मौत है ये .....बेहद शर्मनाक ..




जब भी देश में एक इमानदार,सत्य,न्याय तथा देशभक्ति के साथ पारदर्शिता के लिए काम कर रहे किसी व्यक्ति को मारा जाता है तो वह उस व्यक्ति कि नहीं बल्कि पूरे गणतंत्र,देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री कि मौत होती है |
अहमदाबाद हाईकोर्ट के सामने शाम 8:30 से 8:45 के बीच दो मोटरसाइकिल सवारों के द्वारा गोली मारकर एकबार फिर एक सच्चे हिन्दुस्तानी तथा RTI कार्यकर्ता  अमित जेठवा को मार दिया गया | इस बार भी इस देशभक्त कि हत्या का आरोप देश के भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों पर है जो इसबार BJP से जुड़ा हुआ है और जिसके अवैध खनन के करतूतों को अमित जेठवा उजागर करने पे तुले हुए थे |

निश्चय ही अमित जेठवा जैसे लोगो कि मौत इस देश के गणतंत्र ,राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कि मौत है | क्योंकि अमित जेठवा जैसे लोग इस देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से भी महत्वपूर्ण काम कर रहे होते हैं और ऐसे लोगो कि मौत पूरे देश के लिए शर्मनाक है | अमित जेठवा कि मौत पर देश के कर्ताधर्ता को दोषियों को पकरने के लिए वैसे ही हरकत में आना होगा जैसे किसी देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति कि मौत पर हरकत में आते हैं ,तब जाकर  ऐसे मौतों का सिलसिला रुकेगा | 

अमित जेठवा कि मौत से देश में पारदर्शिता व सूचना के अधिकार के कानून कि मौत एकबार फिर हुयी है | हमारा आग्रह इस देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से है कि अमित जेठवा के हत्यारे को तिन दिनों में पकड़कर सजा दी जाय या अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त को नौकरी से हटाया जाय क्योंकि इस तरह कि हत्या पुलिस अधिकारियों कि गंभीर लापरवाही से ही होते हैं और गणतंत्र रोता है  |

रविवार, 11 जुलाई 2010

असल गणतंत्र,असली आजादी और पुलिस कि भूमिका ........

जरा सोचिये क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कभी कि, आपने पुलिस के किसी अधिकारी से किसी के सुरक्षा कि गुहार लगायी हो और वह अधिकारी तुरंत ही उसपर पूरी तत्परता से एक सच्चे समाज सेवक कि तरह लग गया हो और खुद आपको फोन कर यह जानने का कई बार प्रयास कर रहा हो कि "बताइए सुरक्षा पहुंची या नहीं ,दोषियों के खिलाप कार्यवाही हुयी कि नहीं ?"

पिछले दिनों ऐसा ही हुआ हमारे साथ ,हालाँकि  हम हमेशा से मानते रहें हैं कि अभी भी सरकारी व्यवस्था में इमानदार,सच्चे,अच्छे और देशभक्त लोग मौजूद हैं,वह चाहे पुलिस हो,खुपिया व्यवस्था हो ,प्रशासनिक व्यवस्था हो या अन्य किसी भी प्रकार कि सरकारी सेवा हो | लेकिन भ्रष्टाचार का कोढ़ और भ्रष्ट लोगों का दवाब ज्यादातर अधिकारी नहीं झेल पाते हैं जिससे व्यवस्था सडती जा रही है | व्यवस्था को सडन से बचाने के लिए आम लोगों कि निडरता नामक कीटनाशक कि जरूरत है जिससे ना सिर्फ सडन कम होगी बल्कि अच्छे,सच्चे,देशभक्त और इमानदार अधिकारियों में भ्रष्टाचार का कीड़ा भी नहीं लगेगा |

इस देश का एक इमानदार पुलिस अधिकारी जिनका नाम श्री जसवीर सिंह है जो DIG UP पुलिस  के पद पर कार्यरत हैं ने एक सच्चे और इमानदार समाज सेवक कि  तरह काम किया और दूसरे अधिकारियों  श्री नीलेश कुमार SSP बुलंदशहर को भी ईमानदारी से काम करने को प्रेरित कर एक सच्चे ,अच्छे,देशभक्त और ईमानदारी से समाज और देश में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे श्री राम बंसल जी को दूर दराज के गांव में भी समुचित सुरक्षा पहुंचाकर असल गणतंत्र,असली आजादी और पुलिस कि भूमिका का सच्चा अहसास  कराया | 

निश्चय ही यह एक ऐसी घटना है जिससे देश भर के सभी पुलिस अधिकारियों को प्रेरणा लेकर ईमानदारी से काम करने कि जरूरत है | उपर्युक्त दोनों पुलिस अधिकारियों कि निडरता भरी कार्यप्रणाली सराहनीय ,वंदनीय व अनुकरणीय है | ऐसे ही अधिकारियों से यह देश और समाज व्यवस्था के सडन के बाबजूद घिसट कर ही सही लेकिन आगे बढ़ रहा है ,जिस दिन ऐसे गिने चुने लोग भी ईमानदारी और अपने कर्तव्य को भूल जायेंगे उस दिन ये देश और समाज नहीं बचेगा |

आप लोग चाहें तो श्री जसवीर सिंह जी को उनके इस नेक और एक पुलिस अधिकारी के रूप में सच्चे समाज सेवक कि तरह काम करने के लिए स्वयं भी उनके इ.मेल- jasvir70@gmail.com पर ईमेल कर आभार व्यक्त कर सकते हैं | श्री जसवीर सिंह जी जैसे लोगों से ही सच्चे,अच्छे,देशभक्त और इमानदार लोगों के जज्बों में  मजबूती आती है |

ऐसे पुलिस अधिकारी गाँधी जी के उस सपने को भी साकार कर रहें है कि "गाँधी जी अपने देश के पुलिस को एक सच्चे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में देखना चाहते थे " निश्चय ही हमारे देश कि सारी पुलिस  व्यवस्था  जिस दिन से एक सच्चे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने लगेगा उस दिन से इस देश और समाज में बदलाव आना शुरू हो जायेगा | भारत सरकार को  श्री जसवीर सिंह जी जैसे लोगों को पुलिस को सामाजिक कार्यकर्ता बनाने का कार्यभार जरूर देना चाहिए ,जिसकी आज बहुत जरूरत है | 

श्री राम बंसल जी आज के सच्चे स्वतंत्रता सेनानी ....

श्री जसवीर सिंह जी आज के स्वतंत्रता सेनानी के रक्षक व सही मायने में एक इमानदार पुलिस अधिकारी जिसमे एक सच्चे सामाजिक कार्यकर्ता का असल जज्बा भी है |



रविवार, 6 जून 2010

कांग्रेस का गणतंत्र को आगे बढाने का एक और घोटाला-----?


राजस्थान में स्कोलरशिप घोटाला सामने आया है जिसमे SC ,ST छात्रों को दिया जाने वाला कड़ोरों रूपये का स्कोलरशिप उन शिक्षण संस्थानों को दिया जा रहा था ,जो या तो फर्जी हैं या शिक्षा के नाम पे सिर्फ बिल्डिंग के रूप में स्थापित हैं और जिसमे छात्रों का कहीं कोई अता-पता नहीं है |

सबसे चौकाने वाली बात यह है कि यह घोटाला राजस्थान के उस समाज कल्याण मंत्रालय से जुड़ा है जो राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत के जिम्मे है और शायद इसलिए आनन-फानन में दो निदेशकों को बरखास्त भी कर दिया गया है,शायद यह सोचकर कि मुख्यमंत्री जी कि लाज बच जाये | इसके साथ ही सभी जिला मजिस्ट्रेट को जाँच कर दोषियों के खिलाप FIR भी दायर करने के आदेश दे दिए गयें हैं ,लेकिन जिस देश में कांग्रेस ने सीबीआई को कांग्रेस ब्यूरो ऑफ़ इंवेस्टिगेसन में बदल दिया हो,क्या उस देश में कांग्रेस के ही किसी सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री के विभाग से जुरे मामले कि निष्पक्ष जाँच हो पायेगी ?

और अगर निष्पक्ष जाँच नहीं हो पाई तो निम्नलिखित सवाल का जवाब तो राजस्थान के इमानदार जनता को ही ढूंढना होगा --

1- ये शिक्षण संस्थान किसी मंत्री के ही फर्जी नाम पे तो नहीं चल रहा था ?  
2-ये फर्जीवारा कितने सालों से चल रहा था ?
3-इस फर्जी वारे कि कड़ी कहीं केंद्र में कांग्रेस सरकार में बैठे किसी मंत्री से भी तो नहीं जुड़ा है ?
4-क्या इस तरह का फर्जी वारा दिल्ली में भी हो रहा है अगर हाँ तो इसकी जाँच भी होनी चाहिए ?
5-क्या यह SC ,ST के नाम पर कांग्रेस कि खुली लूट नहीं है,क्योंकि यह कैसे हो सकता है कि इस हेरा फेरी कि खबर उस मंत्री को ना हो जिस मंत्री के पास यह मंत्रालय हो ?  
6-क्या समाज कल्याण के नाम पर कांग्रेस पार्टी कहीं अपने पार्टी फंड का कल्याण तो नहीं कर रही है अगले चुनाव के लिए ,इस घोटाले कि जाँच इस नजरिये से भी होनी चाहिए और देखा जाना चाहिए कि कही ये शिक्षण संस्थान उन लोगों के तो नहीं हैं जिन्होंने कांग्रेस पार्टी फंड में मोटा चंदा दिया हो ,और उसी चंदे कि भरपाई के लिए ये सारा फर्जिवारा किया जा रहा हो ? 

वैसे देखा जाय तो SC ,ST व अन्य पिछरों के उत्थान और समाज कल्याण के नाम पर ये भ्रष्ट मंत्री और पार्टी अपना उत्थान और कल्याण  ही कर रहें बाकि तो सिर्फ कागजों में चल रहा है | निश्चय ही यह घोटाला गंभीर घोटाला है जिसकी जाँच ना सिर्फ राजस्थान बल्कि सारे देश में हर जागरूक नागरिक और समाज सेवकों को करना होगा | 

शर्मनाक  से भी  बढ़कर जघन्य अपराध है यह कि गरीबों और असहाय को मिलने वाला अनुदान भी मंत्रियों और पार्टियों के साजिश द्वारा लूटा जा रहा है ,ऐसे कुकर्मियों को सख्त से सख्त सजा मिले चाहे वह कोई भी हो या किसी भी पार्टी का क्यों ना हो |