आज कितना बदल गया है इंसान...?

गणतंत्र को बचाना है तो भ्रष्ट मंत्रियों को जनयुद्ध के जरिये सरे आम फांसी देनी होगी......

शुक्रवार, 8 अक्तूबर 2010

ब्लोगिंग के जरिये गणतंत्र को आगे बढाने का एक अभूतपूर्व आयोजन का सार्थक प्रयास.....


महात्मा गाँधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविध्यालय वर्धा(महाराष्ट्र) के द्वारा 9-10 अक्टूबर को ब्लोगिंग पे आधारित कार्यशाला और विचार गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है | इस आयोजन का श्रेय विश्वविध्यालय के कुलपति श्री विभूति नारायण राय जी तथा संपरीक्षा अधिकारी श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी के ब्लोगिंग के प्रति सम्मान भरी सोच तथा ब्लोगिंग को सामाजिक सरोकार से जोड़ने क़ी उनकी हार्दिक इच्छा को विशेष रूप से दिया जा सकता है | मैं यह पोस्ट वर्धा से प्रकाशित कर रहा हूँ | मैंने यहाँ पहुंचकर श्री रॉय और श्री त्रिपाठी जी द्वारा इस आयोजन में बुलाये गए ब्लोगरों के लिए किये गए व्यवस्था का भी जायजा लिया ,जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है क़ी यह विश्वविध्यालय श्री रॉय साहब के कुलपति बनने के बाद समुचित विकास क़ी दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और इस विश्वविध्यालय क़ी व्यवस्था काफी अच्छी है | मैं आज श्री विभूति नारायण राय जी से भी मिला जिन्होंने बड़ी गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया और हिंदी ब्लोगिंग से जुड़े आयोजन को नियमित करने का भी आश्वासन दिया जो निश्चय ही अन्य विश्वविध्यालयों के लिए अनुकरणीय है | हम श्री राय के आभारी है जिन्होंने हिंदी ब्लोगिंग को सार्थक दिशा देने के लिए एक उम्दा प्रयास किया है तथा  हिंदी  के विकास  के  लिए  स्थापित  एकमात्र   विश्वविध्यालय  को  सही मायने में जमीनी  स्तर  पर  स्थापित करने का भी नेक और सराहनीय काम किया है  |


ये कुछ चित्र हैं जो मैंने आज अपने कैमरे से कैद किये हैं  जिसमे इस विश्वविध्यालय क़ी हरी-भरी व्यवस्था क़ी छवि  दिखती है ....
विश्वविध्यालय का भव्य मुख्य द्वार
मुख्यद्वार पर लगा हिंदी विश्वविध्यालय का बोर्ड जो हिंदी का सम्मान बढ़ाता हुआ...
विश्वविध्यालय का हरा-भरा माहौल जो शिक्षा के लिए अनुकूल है..
विश्वविध्यालय के कुलपति अपने कार्यालय में मेरा गर्मजोशी से स्वागत करने के बाद अकस्मात आये किसी फोन पर बात करते हुए...
कुलपति महोदय का कार्यालय कक्ष
विश्वविध्यालय के संपरीक्षा अधिकारी श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी अपने कार्यालय में ...




इस ब्लोगिंग के विकास के कार्यशाला में कल जिन जाने-माने ब्लोगरों के उपस्थित होने की पुष्ट सूचना प्राप्त हुई है उनके नाम इस प्रकार हैं ...
श्री अनूप शुक्ल(कानपूर)
डॉ.कविता वाचक्नवी(लन्दन/इलाहबाद)
श्री अविनाश वाचस्पति(दिल्ली)
श्री यशवंत सिंह(दिल्ली)
श्री सुरेश चिपलूनकर(उज्जैन)
डॉ.ऋषभदेव शर्मा (सिकंदराबाद)
डॉ.(श्रीमती)अजित गुप्ता(उदयपुर)
श्री रविन्द्र प्रभात(लखनऊ)
श्री विवेक सिंह (पानीपत)
श्री जाकिर अली रजनीश(लखनऊ)
श्री प्रवीन पाण्डेय(बंगलौर)
श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी(दिल्ली)
श्री प्रियंकर पालीवाल(कलकत्ता)
सुश्री अनीता कुमार (मुंबई)
श्री शैलेश भारतवासी(दिल्ली)
श्री संजय बेंगाणी(अहमदाबाद)
श्री अशोक कुमार मिश्र(मेरठ)
श्री संजीत त्रिपाठी(रायपुर)
डॉ.महेश सिन्हा(रायपुर)
सुश्री गायत्री शर्मा(इंदौर)
श्री विनोद शुक्ल(इलाहाबाद)
तथा मैं जय कुमार झा (दिल्ली) से तो पहुँच ही चुका हूँ...

6 टिप्‍पणियां:

  1. jha ji namaskar nwartri ki hardik shubhkamana !
    talash hai jindagi , kidhar hai jindagi , samajh me nahi aaya , jidhar bhi gaya , siwa taint najar aaya ,andar gaya kuchh bhi najar nahi aaya,sirf sannata sannata najar aaya !
    arganikbhagyoday.blogspot.com
    argnikbhagyoday-jindagijindabad.blogspot.com

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  2. बढिया है... इतने नामचीन ब्लोगर इक्कठा होंगे तो कुछ बात बनेगी.

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  3. सार्थक लेखन के लिये आभार एवं "उम्र कैदी" की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव भी जीते हैं, लेकिन इस मसाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये यह मानव जीवन अभिशाप बना जाता है। आज मैं यह सब झेल रहा हूँ। जब तक मुझ जैसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यही बडा कारण है। भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस षडयन्त्र का शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल दो मिनट का समय हो तो कृपया मुझ उम्र-कैदी का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आप के अनुभवों से मुझे कोई मार्ग या दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये।

    आपका शुभचिन्तक
    "उम्र कैदी"

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  4. कुछ अन्य ब्लॉगों पर भी इन खबरों को प्रमुखता से लिया गया है। अच्छा है। जब मिल बैठेंगे लोग तो कुछ न कुछ बात बनेगी ही।

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