आज कितना बदल गया है इंसान...?

गणतंत्र को बचाना है तो भ्रष्ट मंत्रियों को जनयुद्ध के जरिये सरे आम फांसी देनी होगी......

शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

प्रधानमंत्री जी आपके लिए भी शर्मनाक है ये---------

                                                                                    
चूँकि किसी भी देश का प्रधानमंत्री उस देश के पूरी व्यवस्था का प्रमुख होता है ,इसलिए देश में अगर भ्रष्टाचार और आतंक का माहौल बन चुका है तो उस देश का प्रधानमंत्री अपने आप को इसके लिए जिम्मेवार मानने से किसी भी सूरत में मना नहीं कर सकता और ऐसी वयवस्था जहाँ सच बोलने वाले ,समाज में न्याय के लिए आवाज उठाने वाले और भ्रष्टाचार क़ी शिकायत करने वाले को समाज में झूठे आरोप लगाकर अपमानित किया जाए और दोषियों के बदले शिकायत करने वाले पर ही सख्त से सख्त कार्यवाही कर उसे तबाह और बर्बाद करने क़ी कोशिश सरेआम हो ऐसी स्थिति किसी देश के प्रधानमंत्री के लिए भी बेहद शर्मनाक है /ऐसी स्थिति को रोकने के लिए देश के बजट का अगर आधा हिस्सा भी खर्च करना परे तो करना चाहिए क्योंकि ऐसी स्थिति को रोके बगैर कोई भी देश सही मायने में विकाश कर ही नहीं सकता /प्रधानमंत्री जी अगर आप इमानदार  समाज सेवकों के समूह द्वारा दिल्ली जो आपकी नाक के नीचे है में जाँच करायें तो पाएंगे कि हर तरफ ऐसे लोगों को परेशान किया जाता है जो किसी भी गैरकानूनी गतिविधियों क़ी शिकायत किसी भी जाँच एजेंसी,मंत्रालय,पुलिस या सम्बंधित विभाग में करता है ,यही नहीं शिकायत कर्ता का पूरा बायोडाटा गैरकानूनी गतिविधि करने वाले तक शिकायत मिलते ही पहुंचा दी जाती है और आरोपियों पर कार्यवाही के बदले शिकायत कर्ता का मानसिक प्रतारणा शुरू हो जाता है जिससे शिकायत कर्ता अपने नागरिक कर्तव्यों के बदले मिले धोखे के वजह से पूरी तरह टूट जाता है और आगे कि कार्यवाही तो दूर अपनी दिनचर्या तक के प्रति उदासीन हो जाता है और इसके बाद गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने वाले लोग कानून और व्यवस्था कि धज्जियां उड़ाने और सत्यमेव जयते को अपने जूते तले मसलते हुए अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को और तेज कर देते हैं /हमें शर्म आती है ऐसी व्यवस्था पड़ /क्या आप बताएं और इस देश का प्रधानमंत्री जी बताएं कि ऐसी स्थिति बेहद शर्मनाक है या नहीं ? दरअसल ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेवार भ्रष्टमंत्री ,विधायक,सांसद और उनके प्रतिनिधि हैं /जिनके हर गतिविधियों क़ी जाँच इमानदार समाज सेवकों के समूह द्वारा हर दो महीने में एक बार होनी चाहिए और जाँच रिपोर्ट के आधार पर सख्त से सख्त कार्यवाही भी क़ी जानी चाहिए /यही नहीं किसी भी पैसे क़ी परवाह किये वगैर राष्ट्रिय सतर्कता आयोग को बिना पहचान बताये वगैर गंभीरता से  सामाजिक और वयवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों चाहे वह देश का मंत्री ही क्यों ना हो के खिलाफ शिकायत भेजने का आग्रह देश के हर नागरिक से करना चाहिए /इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का राजनैतिक दखलंदाजी और समूह विशेष का स्वार्थ को दूर रखा जाना चाहिए साथ साथ सच्चे जिम्मेवार नागरिक से सामाजिक जाँच का आवेदन मंगवाकर उन्हें सामाजिक जाँच अधिकारी बनाकर उनको जाँच के बदले हर महीने इनाम और एक एस एच ओ को मिलने वाला पावर दिया जाना चाहिए जिससे उनको जाँच करने में कानूनी अधिकार से सुसज्जित कर निडरता से जाँच करने में सहायता मिल सके / अगर ऐसा नहीं किया गया तो देश का विकाश तो दूर विनाश निश्चित है /

9 टिप्‍पणियां:

  1. SHARM HOTEE TO YE HAL HOTA .CHAKRON SE KYA ANURODH <MALIK ME SHARM KAHAAN?

    हिन्दी ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है !अनेक शुभकामनायें .

    वर्ड वेरिफिकेसन हटा दें .इसका कोई फायदा नहीं सिर्फ तिप्पनेकारों को असुविधा होगी .

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  2. Gambheer aalekh hai..aawaaz loktantr me logon kohee uthanee hogi!

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  3. कितना भी लिख ले
    रोबोट के दिमाग में अपना कुछ नहीं है

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  4. sarvpratham apka swagat hai,...
    apne bahut hi jatil samsya ko prastut kiya hai..
    iska samadhan ham keval PM per nahi chhoda saktte ....sankat to viswas ka hai......hame use hasil karna hoga.....satya pe viswas ...vikalpon ke sthan pe sankalpon ka chayan to sab thik ho jayega...

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  5. Lok gagrutika bahut achha prayas hai aapka aalekh...hame apni orse jo kar sakte hain,karte rahna chahiye!
    Anek shubhkamnayen!

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  6. मित्र जय जी,

    http://gantantradusrupaiyaekdin.blogspot.com/2010/04/blog-post.html

    आपने न केवल वास्तविकता बयाँ की बल्कि प्रधानमन्त्री महोदय को संबोधित करते हुए एक सुलझा हुआ हल भी सुझाया। लेकिन आपको अब एक कहावत याद आएगी "ढाक के तीन पात"। फिर भी आपकी भुक्तभोगी पीड़ा मुझे अपनी पीड़ा को याद करा देती ही। मैं भी पुलिस-पीड़ित हूँ। एक घटना मेरे जीवन की आप भी आकलन करें :

    वाह रे आज का प्रजातंत्र / घूमते सब गुंडे स्वतंत्र / हाय, फैला कैसा आतंक / लगे हैं रक्षक-भक्षक अंक / पुलिस पर एक बड़ा है मंत्र / किसी को पीट करें परतंत्र / घोर है उनका अत्याचार / रोयें सब जन-जन हो लाचार / बनाया था जिनको सरताज / वही सर चढ़े हुए हैं आज / लूटते लाज करें दुश्काज / गिरी न अब तक उनपर गाज।

    प्रभु ! एक विनती है सुन लो / पुलिस को छोडो या धुन दो / हमें तुम ऐसे रक्षक दो / जो भक्षक के भक्षक हों।

    या फिर,

    करें ये राज करें ये राज / शीघ्र आयें हरकत से बाज़ / नहीं तो हो जाएगा नाश / हमारा ये सुन्दर समाज।

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  7. जय कुमार झा जी के विचार ...
    आपने जो अपने "मेरे बारे में" लिखा है ऐसा ही होना असल लोकतंत्र माना जाएगा।
    "मैं चाहता हूँ कि -इस भारत जैसे लोकतंत्र में सही मायने में लोकतंत्र की स्थापना हो यानि ''असल मालिक जनता और सब यहाँ तक कि प्रधानमंत्री तक,एक सच्चे सेवक कि तरह व्यवहार करे,ना कि एक तानाशाह की तरह ''जिससे इस अमीर देश में गरीबी का नामों निशान तक ना हो और हर कोई आम नागरिक हर किसी सरकारी खर्चों और घोटालों की जाँच किसी भी वक्त देश के इमानदार समाज सेवकों से या सामाजिक जाँच के आधार पर कर सके / तब जाकर जनता के खजानों ''सरकारी पैसों ''की लूट बंद होगी /इसके लिए हर नागरिक को एकजुट होने कि जरूरत है, आइए एकजुट हों"

    -- मुझे पसंद आये। सभी को अच्छे लगेंगे।

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  8. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  9. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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