आज कितना बदल गया है इंसान...?

गणतंत्र को बचाना है तो भ्रष्ट मंत्रियों को जनयुद्ध के जरिये सरे आम फांसी देनी होगी......

मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

नकली भारत के ओर तेजी से बढ़ते कदम----

                            
किसी भी देश और समाज क़ी असल पहचान उसके नागरिकों के व्यवहार,शिक्षा,मूलभूत जरूरतों को पूरा करने वाले मौजूद साधन,देश क़ी नीतियों का सामाजिक सरोकार ,सत्य पे आधारित न्याय क़ी समुचित व्यवस्था और ह़र गलत चीजों के ऊपर सख्त न्यायसंगत कार्यवाही से तय होती है /
उपर्युक्त कारणों का जब आप अपनी अच्छी सोच के आधार पर विवेचना करेंगे,तो पायेंगे,क़ी भारत क़ी पहचान पूरी तरह खोखली हो चुकी है ,जिसमे हमारी भ्रष्ट सरकार  नकली भारत के ओर तेजी से बढ़ते कदम वाला पावडर और क्रीम लगा रही है / जनता को इतना बेवस और लाचार कर दिया गया है , क़ी वह दो वक्त क़ी रोटी और अपने बच्चों क़ी जरूरतों को भी सत्य और ईमानदारी पे चलकर पूरा नहीं कर पा रही है / ये हाल , आम और खास , ह़र उस व्यक्ति का है ,जिसका नाता नकली भारत  के निर्माण से नहीं है / ह़र तरफ ठगी और भ्रष्टाचार से हाहाकार मची हुई है ,प्रशासनिक व्यवस्था नाकाम और आवारा पूँजी के विकाश मै लगी है / लोकतंत्र को ह़र जगह दफनाने क़ी तैयारी चल रही है / भ्रष्ट मंत्री गरीबों क़ी रोटी खा-खा कर मोटे हो रहें हैं / आम जनता का घोर अभाव से व्यवहार बदलता जा रहा है /
 निश्चय ही ये किसी देश और उस देश के नागरिकों क़ी रक्षा के लिए संवैधानिक उच्च पदों पर बैठे लोगों और देश के खजानों से लाखों रूपये ह़र माह तनख्वाह पाने वाले लोगों के लिए भी बेहद शर्मनाक है ?
                             आप बताएं, क्या ऐसी स्थिति को "नकली भारत के ओर  तेजी से बढ़ते कदम"नहीं कहा जा सकता है ? 

 हमने देश हित में विचारों और सुझावों के लिए एक मुहीम चलाया हुआ है ,जिसमे उम्दा विचारों और सुझावों को सम्मानित करने क़ी भी व्यवस्था है /

आप सबसे आग्रह है क़ी आप अपना बहुमूल्य विचार पोस्ट में उठाये गए मुद्दे के पक्ष,बिपक्ष या उस उद्देश से जुड़े अन्य बिकल्पों पर सार्थक विवेचना के रूप में अपना 100 शब्द जरूर लिखें / नीचे लिखे लिंक पर क्लिक करने से,वह पोस्ट खुल जायेगा जिसके टिप्पणी बॉक्स में आपको टिप्पणी करनी है /पिछले हफ्ते अजित गुप्ता जी को उम्दा विचारों के लिए सम्मानित किया गया है /

4 टिप्‍पणियां:

  1. यानी,शाइनिंग इँडिया कोई वास्तविक फीलगुड नहीं है!

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  2. "भ्रष्ट मंत्री गरीबों क़ी रोटी खा-खा कर मोटे हो रहें हैं" सत्य ही कहा है. हमें तो लगता है की भारत में समुचित शिक्षा के आभाव में प्रजातांत्रिक प्रणाली का वर्त्तमान स्वरुप में कारगर नहीं है.

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